खाली हाथ
आपको मुझसे गिला होता ना शिकवा होता ,
मेरी मजबूरी गर आपने समझा होता
दर्द की याद में भी दर्द है ये बेहतर था
अपने ग़मों का हिसाब गर हमने रखा होता
ख्वाब देखे थे जो हमने वो सभी सच होते
सोचिये ऐसा होता तो कैसा होता
आज जो नहीं दिखते उनकी आँखों में एक बूंद आंशु
गर हमने भी अपना जूनून न खोया होता
अपने गम से कहीं ज्यादा सताता है दूसरों का गम
गर उस वक़्त हमने भी अपनों के बारे में सोचा होता।
अवंतिका झा
आपको मुझसे गिला होता ना शिकवा होता ,
मेरी मजबूरी गर आपने समझा होता
दर्द की याद में भी दर्द है ये बेहतर था
अपने ग़मों का हिसाब गर हमने रखा होता
ख्वाब देखे थे जो हमने वो सभी सच होते
सोचिये ऐसा होता तो कैसा होता
आज जो नहीं दिखते उनकी आँखों में एक बूंद आंशु
गर हमने भी अपना जूनून न खोया होता
अपने गम से कहीं ज्यादा सताता है दूसरों का गम
गर उस वक़्त हमने भी अपनों के बारे में सोचा होता।
अवंतिका झा
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