Monday, September 2, 2013

kaanoon bana apradhiyon ka panaahgaah

छोटी उम्र का दायरा। …… या अपराधियों के कुकर्मों का पनाहगाह  …… अंतर कुछ ज्यादा  नहीं है ….  देश में हालिया ही हुए दो अपराध के लिए अपराधी ने उम्र का सहारा लिया और सच मानिए यह हौसला  अपराधियों को यक़ीनन जुवेनाइल एक्ट के सरीखे ही आते होंगे।   16 दिसम्बर  को हुए दरिंदगी के लिए महज तीन साल की सज़ा उन मानसिक रोगियों के लिए एक मुकम्म्मल रास्ते जैसा दिख रहा होगा जिसपर चलकर वे जघन्यता की सीमाओं से परे जाने का भरसक प्रयास करेंगे। भारतीय  क़ानून में ऐसे कुकृत्य के लिए संशोधन का प्रावधान होना चहिये। … एक बढ़ा जनाक्रोश का कारण भी हर परिपेक्ष में  सही है। …   .  भारत में हुए इस अपराध के लिए सबसे पहले क़ानून में बदलाव होने चाहिए थे और उसके बाद फैसले को जनभावनाओं के पटल पर रख कर संतुलित तरीके से लिया जाना चाहिए था। । क्योंकि भारत में कई क़ानूनविदों का भी यही मानना रहा कि ऐसे अपराधों के लिए सबसे पहले तो उम्र की बाध्यता को हटा कर एडल्ट की श्रेणी में रख दिया जाना चहिये। …क्योकि ऐसा करने से ना सिर्फ क़ानून ही मजबूत होगा साथ ही उम्र को हथियार बना कर  किये जाने वाले अपराध पर भी अंकुश लग पायेगा। 
















कुक्रित्त्य     भारतीय क़ानून के मानदंडो पर भरोसे से बढ़ जाता है 

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