Wednesday, August 14, 2013

pyaz politics

वाह  प्याज़ वाह तेक्रे या कह्ने…. यह  एक बड़ा ही विचित्र मूल है.…. जिसकी हैसियत सिर्फ निवाले तक नहीं है बल्कि यह अकेला सियासत को बदलने की ताकत रखता है।  इस प्याज़ के क्या कहने। … कभी तो यह लॉकर तक जा पहुचता है तो कभी नेताओं के गिरेबान मैं झूलता नज़र आता है  … कभी तो बरस सकी हैसियत कर सत्ता का मज़ा लुटता है.… तो कभी onion election के नाम से खुद को अमर कर जाता है….  कभी तो ढुलमुल सरकार को रुलाने में भी कामयाब होता है.……  और कभी तो बिरोधी को अपने बहाने सत्ता काबिज कराने के सपने तक दिखता है।   यह प्याज़ प्याज़ नहीं .…… मानो  नेताओं की क़ाबलियत का पैमाना  तय करने का बड़ा  कारण  बन बैठा है.…अपने  तहों की तरह कितनों को बेपर्द करता मालुम होता है. …. . एक तरफ प्याज़ की तरह ही कांग्रेस भी मतदान से पहले रोता नज़र आता है और इलेक्शन के बाद सत्ता का लज़ीज़ स्वाद लेता नज़र आता है। वहीँ दूसरी तरफ बीजेपी की सपने दिखाकर रोने पर  मजबूर कर जाता है… इनके अदब में कुछ न कहियेगा …अब यह गरीब के थाली की शान नहीं बल्कि अमीरों की मल्कियत बन बैठा  है.…….

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