Wednesday, August 7, 2013

nyaypurn sansad

आज का संसद या फिर एक हंगामेंदार अखारा जो चाहे कह लीजिये …. 30  वर्षों से  सामान्यतः यह एक परंपरा का रूप ले चुकी है.……  चर्चा करने के  मुकम्मल तरीके में कमी और सदन स्थगित करने का  उद्देश्य किस तरह देश की प्रगति में बाधक बन पड़ी है.…. इसका अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि 30  वर्षो में  मात्र एक तिहाई बिल ही लोकसभा में  पास हो पायें हैं। … भारतीय संसद को मिश्र के बजाय इंगलैंड की तरह  सशक्त होने की जरुरत है…. सभापति और स्पीकर को अपने अधिकारों का पूर्ण प्रयोग तो करना ही चहिये… धारा 193 ,184 को बेहतर तरीके से लागू किया जाना चहिये. … छोटे-छोटे  मुद्दों पर होने वाले all party meeting में आम सहमती और उदारपूर्ण तरीके से  फैसले लिए जाने चहिये… साथ ही मतदान   की प्रक्रिया के माध्यम से बातों को रखने के बाद …  अतिमहत्वपूर्ण मुद्दों पर ही बहस की जानी चाहिए। … नेताओं को अपनी  आचरण  का ऐसा उदाहण पेश करना चाहिए जो कि जनता की नज़र में खुद को शर्मशार होने से बचता हो… …… 

No comments:

Post a Comment