Saturday, October 6, 2012

pm in waiting...

pm in waiting... जी हां एक और  विवाद जो आज से पहले भारत के इतिहास में इतनी जटिल नहीं हुई थी। यूं तो दो शीर्ष पार्टियों के बीच का संघर्ष काफ़ी पुराना हो चला है, लेकिन इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस का अंतरकलह अब खुलकर सामने आने लगा है। ख़ासकर तीन खेमों में बंटते  देश के लिए आज चिंता का सवाल बना हुआ है। बीजेपी में पीएम की फ़हरिस्त काफी लम्बी चल पड़ी है। नरेन्द्र मोदी, अरुण जेटली, गडकरी और अब सुषमा स्वराज के नाम पर बीजेपी में  अंतर्कलह जारी  है। कांग्रेस और जेडीयू से दो-दो हाथ करता बीजेपी आज अपने ही घेरे में फंसता नजर आ रहा है।आडवाणी का बीजेपी के गद्दावर नेताओं में शूमार की बातें अब पुरानी हो चली थी और लिस्ट में पहला नाम शोराबुद्दीन शेख मामले की वजह से पहले ही रिश्तों में तल्खता आ गयी है। संजय जोशी यूं तो खुलकर सामने आते नज़र नहीं दिख  रहे हैं  लेकिन आतंरिक मतभेद पर उनकी चुप्पी भी  समर्थन करता दिख रहा है। उधर बीजेपी के लिए आतंरिक कलह ही झेल पाना कम नहीं है और ऊपर से जेडीयू के नीतीश से हाथ मिलाना भी मोदी के लिए फायदे का सौदा नहीं जान पड़ रहा है।  नितीश ने  खुले विरोध के जरिये बता दिया है की हाथ मिलने से दिल नहीं मिला करते ....गुजरात विधानसभा में मोदी की गहरी  पैठ होने का दावा पूरा गुजरात करता है , लेकिन नीतीश का अपने खेमे से बाहर  गुजरात में  घुसपैठ से मोदी भी पेशोपेश में नज़र आ  रहे हैं।  यूं तो बीजेपी और कांग्रेस अपने  वायदों की आर में  स्वार्थ की रोटी          पकाने को तैयार हैं। डीजल-पेट्रोल की दामों  में रियायत और सस्ते  कम्पूटर  को लेकर  जनता को  अपनी और खींचने का प्रयास  जारी है। उधर  बीजेपी भी सस्ते फ्लैट और सौ गज जमीन देने की बात कह रहा है.  दोनों शीर्ष पार्टियों में आर-पार की लड़ाई कायम हैं मोदी के गुजरात दंगे से सनी धूमिल चेहरे के साथ सुषमा राग भी अब नयी मुश्किल  हैं। अरुण , जेटली तो पहले से ही  लिस्ट में  शुमार थे पर   संघ मोदी का पिछले दीवार से साथ देता दिख रहा है। मोदी ने लगभग अपने सारे पत्ते खोल दिए हैं मोदी का अटल चाल यानी गुजरात के 150 जगहों पर बुलेटप्रूफ रथ में दौरा और युवा मतदाताओं को झांसे में लेने की कोशिश इस बार की  नयी नीतियों में शामिल है। बहरहाल गुजरात विधानसभा चुनाव का ऊट किस करवट बैठेगा यह तो कह पाना मुश्किल  है, लेकिन यह कलह  एक सफल परिणाम तो अवश्य  दिखाएगी यह उम्मीद तो गुजरात की जनता कर ही सकती है।      अवंतिका

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