Thursday, February 21, 2013

ek akela insaan

रिश्ते बड़े हैं जरुरी ....खट्टी मीठी यादों के सहारे कट जायेंगे , ढाढस बढ़ाते कुछ हाथ ,कुछ साथ ....ज़िन्दगी कभी जोगी जी की जगह रखकर पल भर सोचने की कोशिश की  तो कांप  जाता है मन ... भगवान का इन्साफ देखिये लम्बी उम्र का तोहफा दे डाला और उसे ढोने के लिए लाखों तकलीफें  .


(जोगी जी  -एक  नौकर जिसका काम है कुत्तों का रखरखाव  )

जब भी मासूम सा चेहरा दिखा
तब-तब सोचने को मजबूर हुए हम
कभी तुझे नजदीक से सुनने का मौका मिला
और दुःख के समंदर में उतरते गए हम

गवई भाषा के कुछ शब्द ही समझ पाए होंगे
लेकिन अहसास उतना ही आत्मियता का
जिससे आँखें नाम होने में वक़्त नहीं लगता
जिन्दगी में तो गलतियाँ सबने की
 पर कुछ को ऐसा फल क्यों मिला ?
ताउम्र अकेलापन और सिरहाने कोई सहारा नहीं
उम्र के इस पड़ाव  पर अब कोई गवारा नहीं

लोगों ने कहा जिद्दी है लोगों ने कहा अड़ियल स्वभाव
कौन है जो जिद्दी नहीं ? कौन है जो अडता नहीं  ?
कुछ (खुशकिस्मतों ) के लिए कुछ बचा रह गया
कुछ (बदकिस्मत ) के लिए कुछ रहा ही नहीं

क्या साँसे चलना ही जिंदगी है
दर्द बांटने  के लिए कुत्तों के सिवा कोई नहीं
इंसान से बेहतर जानवरों का सलूक काबिलेतारीफ
अपने रिश्तों का कोई सहारा  नहीं 
गलतियों से जी चुराया तो वक़्त ने साथ छोर  दिया
रिश्तें बनाने की उम्मीद पर  वक़्त ने मन तोर दिया 

बातों से बचपन झलकता और आँखों से बुढ़ापा
इमानदारी की तीखी रोर और कांपते हाथों  में अब भी सहारा 
बूढी आँखों में लम्बी उदासी और  वक़्त का लम्बा तकाज़ा
अब तो किस्मत मान कर ही हम वक़्त काटतें जा रहे हैं


                                                                        अवंतिका झा


Thursday, February 14, 2013

valentine special

"   पिया ओ पिया सवारिया .............
   तु सामने और तुझसे मिलने को तरसे जिया "

  तुझसे अलग नहीं है ये भी सही है
  रब के हाथों सौप दिए मैंने हर सपने
मेरा वो इश्क है जिसमे शब्द नहीं है

किसी शर्त  के बिना दिल दे दिया
तू सामने और तुझसे मिलने को तरसे जिया

कितने मजबूर , अब कोई प्रश्न  नहीं है
तेरे होठों की खुशी में  मेरी खुशी है
किस्मत मान लिया है मैंने
कोई शिकायत नहीं है  
 
सारी यादें खो गयी, कोई गम नहीं है
एक तू रहे मेरे साथ इतना याकी है

 किसी स्वार्थ के बिना  प्यार  किया
 तू सामने और तुझसे मिलने को तरसे जिया
                                                                         अवंतिका झा
   

  

Friday, February 8, 2013

 मोदी और राहुल के बीच की जंग आगे 2014 के लिए भी उतनी ही तजा बहस होगी जितनी की आज के लिए है। राहुल का उपाध्यक्ष बनाया जाना गले की ऐसी हड्डी से कम नहीं है लिकिन जब कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टी के लिए यह किसी बड़े समारोह से कम नहीं था। उधर मोदी का बीजेपी का अध्यक्ष बनाया जाना उस लहजे से कबिलेताफिफ ही कहा जायेगा जब पार्टी के सभी बड़े दिग्गजों में आम सहमती से लिया गया निर्णय था। जी हाँ एक प्रखर  उम्रदराज और अनुभवी व्यक्ति जिससे बड़ी बागडौर सम्हालने की उम्मीद की जा सकती है  और इसीलिए  भावी भविष्य में प्रधानमंत्री बनाने की कवायते तेज़ हो गयी है। लेकिन मसला इतना आसन नहीं है जितना की दिख रहा है।