रिश्ते बड़े हैं जरुरी ....खट्टी मीठी यादों के सहारे कट जायेंगे , ढाढस बढ़ाते कुछ हाथ ,कुछ साथ ....ज़िन्दगी कभी जोगी जी की जगह रखकर पल भर सोचने की कोशिश की तो कांप जाता है मन ... भगवान का इन्साफ देखिये लम्बी उम्र का तोहफा दे डाला और उसे ढोने के लिए लाखों तकलीफें .
(जोगी जी -एक नौकर जिसका काम है कुत्तों का रखरखाव )
जब भी मासूम सा चेहरा दिखा
तब-तब सोचने को मजबूर हुए हम
कभी तुझे नजदीक से सुनने का मौका मिला
और दुःख के समंदर में उतरते गए हम
गवई भाषा के कुछ शब्द ही समझ पाए होंगे
लेकिन अहसास उतना ही आत्मियता का
जिससे आँखें नाम होने में वक़्त नहीं लगता
जिन्दगी में तो गलतियाँ सबने की
पर कुछ को ऐसा फल क्यों मिला ?
ताउम्र अकेलापन और सिरहाने कोई सहारा नहीं
उम्र के इस पड़ाव पर अब कोई गवारा नहीं
लोगों ने कहा जिद्दी है लोगों ने कहा अड़ियल स्वभाव
कौन है जो जिद्दी नहीं ? कौन है जो अडता नहीं ?
कुछ (खुशकिस्मतों ) के लिए कुछ बचा रह गया
कुछ (बदकिस्मत ) के लिए कुछ रहा ही नहीं
क्या साँसे चलना ही जिंदगी है
दर्द बांटने के लिए कुत्तों के सिवा कोई नहीं
इंसान से बेहतर जानवरों का सलूक काबिलेतारीफ
अपने रिश्तों का कोई सहारा नहीं
गलतियों से जी चुराया तो वक़्त ने साथ छोर दिया
रिश्तें बनाने की उम्मीद पर वक़्त ने मन तोर दिया
बातों से बचपन झलकता और आँखों से बुढ़ापा
इमानदारी की तीखी रोर और कांपते हाथों में अब भी सहारा
बूढी आँखों में लम्बी उदासी और वक़्त का लम्बा तकाज़ा
अब तो किस्मत मान कर ही हम वक़्त काटतें जा रहे हैं
अवंतिका झा
(जोगी जी -एक नौकर जिसका काम है कुत्तों का रखरखाव )
जब भी मासूम सा चेहरा दिखा
तब-तब सोचने को मजबूर हुए हम
कभी तुझे नजदीक से सुनने का मौका मिला
और दुःख के समंदर में उतरते गए हम
गवई भाषा के कुछ शब्द ही समझ पाए होंगे
लेकिन अहसास उतना ही आत्मियता का
जिससे आँखें नाम होने में वक़्त नहीं लगता
जिन्दगी में तो गलतियाँ सबने की
पर कुछ को ऐसा फल क्यों मिला ?
ताउम्र अकेलापन और सिरहाने कोई सहारा नहीं
उम्र के इस पड़ाव पर अब कोई गवारा नहीं
लोगों ने कहा जिद्दी है लोगों ने कहा अड़ियल स्वभाव
कौन है जो जिद्दी नहीं ? कौन है जो अडता नहीं ?
कुछ (खुशकिस्मतों ) के लिए कुछ बचा रह गया
कुछ (बदकिस्मत ) के लिए कुछ रहा ही नहीं
क्या साँसे चलना ही जिंदगी है
दर्द बांटने के लिए कुत्तों के सिवा कोई नहीं
इंसान से बेहतर जानवरों का सलूक काबिलेतारीफ
अपने रिश्तों का कोई सहारा नहीं
गलतियों से जी चुराया तो वक़्त ने साथ छोर दिया
रिश्तें बनाने की उम्मीद पर वक़्त ने मन तोर दिया
बातों से बचपन झलकता और आँखों से बुढ़ापा
इमानदारी की तीखी रोर और कांपते हाथों में अब भी सहारा
बूढी आँखों में लम्बी उदासी और वक़्त का लम्बा तकाज़ा
अब तो किस्मत मान कर ही हम वक़्त काटतें जा रहे हैं
अवंतिका झा